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3 दिन से संस्कार का इंतजार रहा था शव, गौ सेवक डब्बू महाराज ने कराया अंतिम संस्कार !

इंसानियत की मिसाल बनकर आगे आए डब्बू महाराज, कराई गरीब छात्र की अंत्येष्टि, तीन दिन से जिला अस्पताल में पड़ा था शव, परिजनों के पास अंत्येष्टि तक के लिए नहीं थे पैसे, हरिओम गौशाला के वाहन से लाया गया शव, गौशाल से ही हुआ अंतिम क्रिया कर्म…….

छतरपुर : तीन दिन पहले सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से कटने के कारण जिस 15 वर्षीय छात्र का सिर कटा शव मिला था, उसका तीन दिन से अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा था. मृतक के घर अंतिम संस्कार तक के लिए रुपए नहीं थे. पिता की मौत के बाद परिवार के चाचा लोगों ने पैतृक संपत्ति पर कब्जा करके उन्हें घर से बेदखल कर दिया था. मृतक अपने छोटे भाई और मां के साथ बड़ी कुंजरहटी में एक किराए के मकान में रह रहा था. जिस मकान में वह रहता था उसके मकान मालिक ने भी अपने घर में पार्थिव शरीर लाने से मना कर दिया था क्योंकि उनके घर शादी थी. ऐसी स्थिति में छात्र का शव जिला अस्पताल में अंतिम संस्कार के इंतजार में पड़ा-पड़ा सडऩे लगा था.

इस बारे में जब गौसेवक एवं भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष पारस दुबे डब्बू महाराज को पता चला तो उन्होंने खुद ही अंतिम संस्कार करवाने का निर्णय लिया और सोमवार को दोपहर में छात्र रंजीत यादर्फ उर्फ बिट्टू के शव का अंतिम संस्कार हरिओम गौशाला से करवाया. इस दौरान समाज सेवी पं. सौरभ तिवारी ने वैदिक संस्कार पूरे करवाए.

जानकारी के अनुसार अंबेडकर नगर निवासी स्व. सत्यप्रकाश यादव के बेटे रंजीत उर्फ बिट्टू यादव का शव तीन दिन पहले छतरपुर में रेलवे ट्रैक पर मिला था. उसकी गर्दन शरीर से अलग हो गई थी. बिट्टू कक्षा 9वीं का छात्र था. उसके छोटे भाई नीरज यादव ने बताया कि उसके चाचा लोगों ने पिता के निधन के बाद उन्हें घर से बेदखल कर दिया था और पैतृक संपत्ति पर कब्जा कर लिया था. इससे उसका बड़ा भाई भी परेशान था. दो दिन पहले जब भाई की मौत का पता चला तो वे बिलख पड़े. घर में खाने के लाले पड़े थे. अंत्येष्टि की व्यवस्था कैसे करते. मकान मालिक का किराया भी पहले से बाकी था. उनके घर शादी होने के कारण उन्होंने भी शव को उनके यहां लाने से इनकार कर दिया था. ऐसी स्थिति में वह लोग जिला अस्पताल के पीएम हाउस से शव लाने की हिम्मत भी नहीं कर पा रहे थे. नीरज ने बताया कि जब उसे गौसेवक डब्बू महाराज के बारे में पता चला तो उनसे संपर्क किया. मेरी स्थिति सुनते ही वे अंत्येष्टि कराने के लिए तैयार हो गए. आज उन्होंने विधि विधान से भाई की अंत्येष्टि करा दी और आगे के संस्कार कराने के लिए भी वे करवा रहे हैं.

घर में थी रामायण बैठकी, लेकिन गरीब की अंत्येष्टि कराने निकल पड़े – सालों से निस्वास्र्थ भाव से गौसेवा करने वाले भाजपा नगर मंडल के हालही में अध्यक्ष बनाए गए पारस दुबे डब्बू महाराज के घर में सोमवार से धार्मिक आयोजन शुरू हुआ है. उनके घर में बने मंदिर मेें अखाड़ा वाले हनुमान जी की पुन: प्रतिष्ठा होनी है. इसके लिए अखंड रामायण की बैठकी सोमवार को हुई और भंडारा का कार्यक्रम भी मंगलवार को होना है. लेकिन डब्बू महाराज के पास जब रंजीत यादव की जानकारी आई तो उन्होंने बिना कुछ सोचे रात में ही उसके अंतिम संस्कार के लिए तैयारियां कर लीं. इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के नीरज चतुर्वेदी, रविंद्र, मिश्रा, रक्कू गोस्वामी, दीपक दुबे, जीतू वर्मा, हर्षवर्धन चतुर्वेदी आदि को एकत्र किया. सुबह जब जिला अस्पताल से शव वाहन नहीं मिला तो उन्होंने अपनी गौशाला का वाहन शव ले जाने भेजा. इधर अंतिम संस्कार के लिए सामग्री से लेकर लकड़ी और कफन तक का उन्होंने इंतजाम करवाया. इसके बाद गौशाला से ही गरीब छात्र रंजीत के शव को अर्थी पर रखवाकर खुद भी कांधा दिया. रंजीत को मुखाग्नि उसके छोटे भाई नीरज यादव ने दी.

गौसेवक पारस दुबे ने कहा कि उनके गुरु संत आसाराम बापू की प्रेरणा के कारण ही वे ऐसे काम के लिए सामर्थ्य जुटा पाते हैं. अंतिम संस्कार में पार्षद पुष्पेन्द्र चौरसिया, देवेन्द्र अनुरागी, दिनेश यदुवंशी, राजू रैकवार, नरेश खटीक, अंकित विश्वकर्मा, पार्षद धांधू यादव, चरन सिंह यादव आदि शामिल हुए.

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