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हम परमात्मा को नहीं, बल्कि हम परमात्मा से चाहते हैं- छुल्लक विसौम्य सागर

दमोह : हम सभी अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहते है. परमात्मा को पूजते पर बो कभी किसी की नही सुनता क्योकि हम परमात्मा को नही चाहते, कहते बस हे की हम परमात्मा को चाहते हैं. सच तो ये हे की हम परमात्मा को नही चाहते बल्कि परमात्मा से चाहते है. अगर राजा को चाहोगे तो सब तुम्हारा होगा और यदि उसकी दौलत पर ही नजर हे तो थोड़ा बहुत देकर शांत कर देगा. यह बात छुल्लक विसौम्य सागर जी महाराज ने तात्कालिक परिस्थितियों पर प्रवचन देते हुए कही.

छुल्लक श्री ने यह भी कहा कि परमात्मा उसे ही सब कुछ देता है जो परमात्मा से चाह नहीं करता. क्योंकि परमात्मा से चाहने वाले व्यक्ति को परमात्मा पसंद नहीं करता. फिर भी परमपिता परमात्मा आपके चाहने से थोड़ा बहुत देकर आप को संतुष्ट करने की कोशिश करता है. लेकिन जो व्यक्ति परमात्मा से कुछ नहीं चाहते उन्हें परमात्मा भरपूर देता है. क्योंकि परमात्मा मानता है कि उनका सच्चा भक्त वही है जो कुछ चाहे नहीं रखता. परमात्मा को पाने के लिए निष्काम भाव से भक्ति करना पड़ती है. तभी उसका प्रतिफल मिलता है. क्योंकि परमात्मा से चाहने वाला बहुत कुछ चाहता है और परमात्मा उसको सब कुछ देता नहीं है. और जो व्यक्ति कुछ नहीं चाहता उसे परमात्मा जो दे देता है उसमें वह संतुष्ट हो जाता है, और यह भी मानता है कि उसे सब कुछ मिल गया. ऐसे में मांगने वाला भक्त यह मानता है कि परमात्मा से मांगने पर उसने कम दिया और ना मांगने वाला भक्त परमात्मा द्वारा दिए गए को संपूर्ण मानते हुए बहुत कुछ देने की बात करता है असल में यह भक्तों की संतुष्टि का ही खेल है. जिससे वह परमात्मा द्वारा देना बताता है.

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