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संकट की घड़ी में जिम्मेदारी निभा रही दो महिला अधिकारी, क्वॉरेंटाइन सेंटर का बनाया गया है नोडल प्रभारी!

संकट की घड़ी में अपने तरीके से पूरी लगन और निष्ठा के साथ लोगों की मदद में जुटी दो महिला अधिकारी,
डिप्टी कलेक्टर भव्या त्रिपाठी और प्लाटून कमांडर प्राची दुबे. इनका जोखिम हमारे लिए सुरक्षा कवच से कम नहीं.


दमोह : देखा जाये तो जिले में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में दर्जनों ऐसे अधिकारी, कर्मचारी हैं जो इस कोरोना वायरस से संक्रमण के संकट की घड़ी में अपने- अपने तरीके से लोगों की मदद में जुटे हुए हैं. लेकिन इनमें भी कुछ ऐसे खास हैं जिनके हाथ में इस संकट काल से शहर को बचाने के लिए बड़ी जवाबदारी सौंपी गई है और वह इसे भली-भांति निभा रहे हैं. अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरे की जॉन बचाना बहुत ही कठिन कार्य है. अपनी जान जोखिम में डालना सहज नहीं है, यह सब केवल वही कर सकते हैं जो अपने साथ दूसरों का भी भला सोचते हैं. जिला मुख्यालय की ऐसी दो महिला अधिकारी है, जो दमोह के लोगों को कोरोना जैसी महामारी के संक्रमण से बचाने के लिए हर दिन खुद को जोखिम में डाल रही हैं. यही नहीं अपने स्वजनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खुद को उनसे अलग रहकर यह कार्य कर रही है.

हम बात कर रहे हैं जिला प्रशासन की डिप्टी कलेक्टर भव्या त्रिपाठी और एसडीआरएफ की प्लाटून कमांडर प्राची दुबे की. जो पूरी लगन और निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी निभा रही हैं और सभी बाहर से आने वालों को क्वारंटाइन सेंटर तक पहुंचा रही हैं. प्रशासनिक व्यवस्था के तहत दूसरे शहरों से आने वाले लोगों को क्वारंटाइन सेंटरों पर रखा जा रहा है. जिसका नोडल प्रभारी डिप्टी कलेक्टर भव्या त्रिपाठी और एसडीआरएफ की प्लाटून कमांडर प्राची दुबे को बनाया गया है. यह दोनों महिला अफसर खुद भी अपने घरों में क्वारंटाइन है और परिवार के अन्य सदस्यों से मिलना जुलना भी बंद किये हुये है. यह अपनी ड्यूटी भी पूरी मुस्तैदी से कर रही हैं. अपने परिवार से 14 दिन तक दूर रहकर क्वारंटाइन सेंटर में रहने वाले लोगों को अपने स्वजनों की याद न सताए या किसी तरह की उन्हें पीड़ा ना हो इसके लिए भी इनके कई प्रयास जारी हैं. जिसमें सुबह-शाम क्वारंटाइन किए गए लोगों को योगाभ्यास कराना प्रमुख है. इस संबंध में जब डिप्टी कलेक्टर भव्या त्रिपाठी से बात की तो उन्होंने बताया क्वारंटाइन किए लोगों को कोई असुविधा न हो इसका विशेष ध्यान रखा गया है. स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उनकी स्क्रीनिंग कराई जाती है, उनके मनोरंजन के लिए सुबह योगाभ्यास और शाम को पीटी होती है. इस कार्य के लिये ट्रेनर और स्पोर्टस टीचर से सहायता ली जा रही. एमडीएम के माध्यम से वितरित होने वाले खाने और नाश्ते का विशेष ध्यान रखा जाता है. विशेष बात यह है कि आयुष विभाग की ओर से काड़ा पिलाया जा रहा है.

वे बताती हैं वह 24 मार्च से इस कार्य को संभाल रही हैं और स्वयं की सुरक्षा को देखते हुए घर पहुंचने के पहले ही खुद को सैनिट्राइज करने के बाद ही घर में प्रवेश करती हैं. चूंकि वह घर पर अकेली ही रहती हैं इसलिए समझिए कि होम क्वारंटाइन ही हैं. एसडीआरएफ होमगार्ड विभाग की प्लाटून कमांडर प्राची दुबे बताती हैं 24 घंटे वे और भव्या मैडम एलर्ट रहती हैं. देर रात भी यदि कोई बाहरी व्यक्ति शहर की सीमा में प्रवेश करता है तो वे तत्काल मौके पर पहुंचती हैं और उसकी स्क्रीनिंग कराकर क्वारंटाइन करवाकर वापस आती हैं. अभी तक करीब 200 लोगों को क्वारंटाइन कर चुकी हैं और करीब 500 लोगों को होम क्वारंटाइन किया गया है. वह घर पहुंचकर अपने आप को सैनिट्राइज कर होम क्वारंटाइन कर लेती हैं. अपना अलग कमरा कर लिया है और उसी में वह रहती हैं. परिवार के लोग टेबिल पर खाना रखकर चले जाते हैं. वर्दी को रात में ही धोकर अगले दिन नई वर्दी पहनती हैं वे 1 अप्रेल से लगातार इस कार्य में लगी हैं.

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