Domain Registration ID: DD9A736AA76EB45DBBFAF21E3264CDF2D-IN {Editor - Ashish Kumar Jain 9425081918}

कैसे ? बचेगी विरासत, परम्‍परा, संस्‍कृति, दुकानें तो सजी पर ग्राहक नहीं आ रहे!

संजय जैन / हटा दमोह : महाशिवरात्रि के अवसर पर हर क्षेत्र वर्ग का आदमी अलग अलग उम्‍मीदों के साथ पर्व को मनाता है, पथ मार्ग पर दुकान लगाने वाले छोटे छोटे व्‍यापारी भी कई सपने लेकर मंदिरों के समीप दुकानें लगाते है, इन दुकानों पर जिस समाग्री को विक्रय के लिए सजाया जाता है उसकी तैयारी कई दिनों पूर्व से ही कर दी जाती है, घर की जमापूंजी भी इसमें लगा देते है, विश्‍वास रहता है कि त्‍यौहार पर मंदिर आने वाले भक्‍त जन समान जरूर खरीदेगें, जो पैसा आयेगा उससे ही बेटा के स्‍कूल की फीस भर देगें, मां की दवाई आ जायेगी, बेटी कई दिन से चप्‍पल व कपडे लेने को कह रही थी, उसे नये कपडे ला देगें आदि आदि सपनों के साथ आज दुकानें लगाई गई।

जब मंदिर के पास बिकने वाले मिट्टी के गुल्‍लक, तोता, कबूतर, मोर, लोहे के बर्तन आदि की दुकानों पर निरंतर 55 मिनिट तक नजर लगाये रहा, देखा क‍ि दुकानों की सजावट तो है पर वहां एक भी ग्राहक नहीं है, कुछ छोटे दुकानदारों ने तो कहा कि अब तो मजदूरी की बात अलग भाडा भी नहीं निकल रहा है, ऐसे में क्‍या मेला की विरासत, संस्‍कृति, परम्‍परा को बचाया जा सकता है, कुछ वर्ष पूर्व तक जिन पथ मार्ग विक्रेताओं की दुकानों पर भीड दिखाई देती थी वहां पूरी तरह सन्‍नाटा पसरा रहा। पूर्व में जो कहते थे कि देश में बहुराष्‍ट्रीय कंपनी व्‍यापार करेगी तो बेरोजगारी फैलेगी, छोटा व्‍यापारी खत्‍म हो जायेगा, अब वे स्‍वयं बडे बडे शापिंग माल का उद्घाटन कर रहे है। इन छोटे पथ मार्ग विक्रेताओं एवं उनके परिवार को जीवित रखने के लिए लोन की नहीं बाजार उपलब्‍ध कराने की आवश्‍यकता पर ध्‍यान देना होगा।

Our Visitor

9 4 2 5 7 0
Users Today : 16
Total Users : 942570
Who's Online : 0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: