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आदर्श आचार संहिता पढ़िए और जानिए!

किसी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये, जो विभिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेदों को बढ़ाये या घृणा की भावना उत्पन्न करें या तनाव पैदा करे- कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री तरूण राठी


दमोह : कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी तरूण राठी ने आर्दश आचारण संहिता की जानकारी देते हुए बताया कि किसी दल या अभ्यर्थी को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये, जो विभिन्न जातियों और धार्मिक या भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेदों को बढ़ाये या घृणा की भावना उत्पन्न करें या तनाव पैदा करे। जब अन्य राजनैतिक दलों की आलोचना की जाये, तो वह उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पूर्व रिकार्ड और कार्य तक ही सीमित होनी चाहिये। यह भी आवश्यक है कि व्यक्तिगत जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना नहीं की जानी चाहिये, जिनका संबंध अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक क्रियाकलाप से न हो। दलों या उनके कार्यकर्ताओं के बारे में कोई ऐसी आलोचना नहीं की जानी चाहिये, जो ऐसे आरोपों पर जिनकी सत्यता स्थापित न हुई हो या जो तोड़-मरोड़कर कही गई बातों पर आधारित हों।

मत प्राप्त करने के लिये जातीय या साम्प्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं दी जानी चाहिये। मस्जिदों, गिरजाघरों, मंदिरों या पूजा के अन्य स्थानों का निर्वाचन प्रचार के मंच के रूप में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिये। सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यों से ईमानदारी के साथ बचना चाहिये, जो निर्वाचन विधि के अधीन ‘भ्रष्ट आचरण’ और अपराध हैं जैसे कि मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओं को डराना/धमकाना, मतदाताओं का प्रतिरूपण, मतदान केन्द्र के 100 मीटर के भीतर मत याचना करना, मतदान की समाप्ति के लिये नियत समय को खत्म होने वाली 48 घंटे की अवधि के दौरान सार्वजनिक सभाएं करना और मतदाताओं को वाहन से मतदान केन्द्रों तक ले जाना और वहां से वापस लाना।

सभी राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों को इस बात का प्रयास करना चाहिये कि वे प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण और विघ्नरहित घरेलू जिन्दगी के अधिकार का आदर करें चाहे वे उसके राजनैतिक विचारौं या कार्यों के कितने ही विरूद्ध क्यों न हों । व्यक्तियों के विचारों या कार्यों का विरोध करने के लिये उनके घरों के सामने प्रदर्शन करने या धरना देने के तरीकों का सहारा किसी भी परिस्थति में नहीं लेना चाहिये ।

किसी भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को ध्वजदण्ड बनाने, ध्वज टांगने, सूचनाएं चिपकाने, नारे लिखने आदि के लिये किसी भी व्यक्ति को भूमि, भवन, अहाते, दीवार आदि का उसकी अनुमति के बिना उपयोग करने की अनुमति अपने अनुयायियों को नहीं देनी चाहिये। राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि उनके समर्थक अन्य दलों द्वारा आयोजित सभाओं-जुलूसों आदि में बाधायें उत्पन्न न करें या उन्हें भंग न करें। एक राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं या शुभचिंतकों को दूसरे राजनैतिक दल द्वारा आयोजित सार्वजनिक सभाओं में मौखिक रूप से या लिखित रूप से प्रश्न पूछकर या अपने दल के परचे वितरित करके गड़बड़ी पैदा नहीं करनी चाहिये | किसी दल द्वारा जुलूस उन स्थानों से होकर नहीं ले जाना चाहिये, जिन स्थानों पर दूसरे दल द्वारा सभाएं की जा रही हों। एक दल द्वारा लगाए गये पोस्टर दूसरे दल के कार्यकर्ताओं द्वारा हटाये नहीं जाने चाहिये ।

दल या अभ्यर्थी को किसी प्रस्तावित सभा के स्थान और समय के बारे में स्थानीय प्राधिकारियों को उपयुक्त समय पर सूचना दे देनी चाहिए ताकि वे यातायात को नियंत्रित करने और शांति तथा व्यवस्था बनाये रखने के लिए आवश्यक इंतजाम कर सके। दल या अभ्यर्थी को उस दशा में पहले ही यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उस स्थान पर जहां सभा करने का प्रस्ताव है, कोई निर्बन्धात्मक या प्रतिबंधात्मक आदेश लागू तो नहीं है यदि ऐसे आदेश लागू हों तो उनका कड़ाई के साथ पालन किया जाना चाहिए। यदि ऐसे आदेशों से कोई छूट अपेक्षित हो तो उसके लिए समय से आवेदन करना चाहिए और छूट प्राप्त कर लेनी चाहिए।

यदि किसी प्रस्तावित सभा के संबंध में लाउडस्पीकरों के उपयोग या किसी अन्य सुविधा के लिए अनुज्ञा या अनुज्ञप्ति प्राप्त करनी हो तो दल या अभ्यर्थी को सम्बद्ध प्राधिकारी के पास काफी पहले ही से आवेदन करना चाहिए और ऐसी अनुज्ञा या अनुज्ञप्ति प्राप्त कर लेनी चाहिए।
किसी सभा के आयोजकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे सभा में विध्न डालने वाले या अन्यथा अव्यवस्था फैलाने का प्रयत्न करने वाले व्यक्तियों से निपटने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिस की सहायता प्राप्त करें।

आयोजकों को चाहिए कि वे स्वयं ऐसे व्यक्तियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई न करें। जुलूस का आयेाजन करने वाले दल या अभ्यर्थी को पहले ही यह बात तय कर लेनी चाहिए कि जुलूस किस समय और किस स्थान से शुरू होगा, किस मार्ग से होकर जायेगा और किस समय और किस स्थान पर समाप्त होगा। कार्यक्रम में कोई फेरबदल नहीं होनी चाहिए।
आयोजको को चाहिए कि वे कार्यक्रम के बारे में स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों को पहले से सूचना दे दें, ताकि वे आवश्यक प्रबंध कर सकें।

आयोजको को यह पता कर लेना चाहिए कि जिन इलाको से होरक जुलूस गुजरता है, उनमें कोई निर्बन्धात्मक आदेश तो लागू नहीं है और जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा विशेष रूप से छूट न दे दी जायें, उन निर्बन्धनों की पालना करना चाहिए। आयोजको को जुलूस का आयोजन ऐसे ढंग से करना चाहिए, जिससे कि यातायात में कोई रूकावट या बाधा उत्पन्न किये बिना जुलूस का निकलना संभव हो सके। यदि जुलूस बहुत लम्बा है तो उसे उपयुक्त लम्बाई वाले टुकड़ो में संगठित किया जाना चाहिए, ताकि चौराहो से होकर गुजरना है, रूके हुए यातायात के लिए समय-समय पर रास्ता दिया जा सके और इस प्रकार भारी यातायात के जमाव से बचा जा सके। जुलूसों की व्यवस्था ऐसी होने चाहिए कि जहां तक हो सके उन्हें सड़क की दायी ओर रखा जाये और ड्यूटी पर तैनात पुलिस के निर्देश और सलाह का कड़ाई के साथ पालन किया जाना चाहिए।

यदि दो या अधिक राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों ने लगभग उसी समय पर उसी रास्ते से या उसके भाग से जुलूस निकालने का प्रस्ताव किया है तो आयोजकों को चाहिए कि वे समय से काफी पूर्व आपस में सम्पर्क स्थापित करें और ऐसी योजना बनाएं, जिससे कि जुलूसों में टकराव न हो या यातायात को बाधा न पहुंचे। स्थानीय पुलिस की सहायता संतोषजनक इंतजाम करने के लिए सदा उपलब्ध होगी। इस प्रयोजन के लिए दलों को यथाशीघ्र पुलिस से सम्पर्क स्थापित करना चाहिए।

जुलूस में शामिल लोगों द्वारा ऐसी चीजे लेकर चलने के विषय में जिनका अवांछनीय तत्वों द्वारा, विशेष रूप से उत्तेजना के क्षणों में दुरूपयोग किया जा सकता है, राजनैतिक दलों या अभ्यर्थियों को उन पर अधिक से अधिक नियंत्रण रखना चाहिए। किसी भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को अन्य राजनैतिक दलों के सदस्यों या उनके नेताओं के पुतले लेकर चलने, उनको सार्वजनिक स्थान में जलाने और इसी प्रकार के अन्य प्रदर्शनों का समर्थन नहीं करना चाहिए।

सभी राजनैतिक दलों और अभ्यार्थियों को
चाहिए कि वे— यह सुनिश्चित करने के लिए कि मतदान शांतिपूर्वक और सुव्यवस्थित ढंग से हो और मतदाताओं को इस बात की पूरी स्वतंत्रता हो कि वे बिना किसी परेशानी या बाधा के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके, निर्वाचन कर्त्तव्य पर लगे हुए अधिकारियों के साथ सहयोग करें। अपने प्राधिकृत कार्यकर्त्ताओ को उपयुक्त बिल्ले या पहचान पत्र दें।
इस बात से सहमत हों कि मतदाताओं को उनके द्वारा दी गई पहचान पर्चियों सादे (सफेद) कागज पर होगी और उन पर कोई प्रतीक, अभ्यर्थी कानाम या दल का नाम नहीं होगा। मतदान के दिन आर उसके पूर्व के 48 घंटो के दौरान किसी को शराब पेश या बितरित न किया जायें।
राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों द्वारा मतदान केन्द्रों के निकट लगाये गये कैम्पों के नजदीक आवश्यक भीड़ इक्कट्ठी न होने दें, जिससे दलों और अभ्यर्थियों के कार्यकर्त्ताओं और शुभचिंतकों में आपस में मुकाबला और तनाव न होने पाये। यह सुनिश्चित करें कि अभ्यर्थियों के कैम्प साधारण हो। उन पर कोई पास्टर, झण्डे, प्रतीक या कोई अन्य प्रचार सामग्री प्रदर्शित न की जाये। कैम्पों में खाद्य पदार्थ पेश न किये जाये और भीड़ न लगाई जायें। मतदान के दिन वाहन चलाने पर लगाये जाने वाले निर्बन्धनों का पालन करने में प्राधिकारियों के साथ सहयोग करें और वाहनों के लिए परमिट प्राप्त कर लें और उन्हें उन वाहनों पर ऐसे लगा दें जिससे ये साफ-साफ दिखाई देते रहे।


मतदान केन्द्र
मतदाताओं के सिवाय कोई भी व्यक्ति निर्वाचन आयोग द्वारा दिये गये विधिमान्य पास के बिना मतदान केन्द्रों में प्रवेश नहीं करेगा।

प्रेक्षक
निर्वाचन आयोग प्रेक्षक नियुक्त करता है, यदि निर्वाचनों के संचालन के संबंध में अभ्यर्थियों या उनके अभिकर्ताओं को कोई विशिष्ट शिकायत या समस्या हो तो वे उसकी सूचना प्रेक्षक को दे सकते है।

सत्ताधारी
सत्ताधारी दल को, चाहे वे केन्द्र में हो या संबंधित राज्य या राज्यों में हों, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह शिकायत करने का कोई मौका न दिया जायें कि उस दल ने अपने निर्वाचन अभियान के प्रयोजनों के लिए अपने सरकारी पद का प्रयोग किया है और विशेष रूप से:- मंत्रियों को अपने शासकीय दौरों को, निर्वाचन से संबंधित प्रचार के साथ नहीं जोड़ना चाहिए और निर्वाचन के दौरान प्रचार करते हुए शासकीय मशीनरी अथवा कार्मिकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
सरकारी विमानों, गाड़ियों सहित सरकारी वाहनों, मशीनरी और कार्मिकों का सत्ताधारी दल के हित को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग नहीं किया जायेगा।

सत्ताधारी दल को चाहिए कि वह सार्वजनिक स्थान जैसे मैदान इत्यादि पर निर्वाचन सभाएं आयोजित करने और निर्वाचन के संबंध में हवाई उड़ानों के लिए हैलीपेडों का इस्तेमाल करने के लिए अपना एकाधिकार न जमाएं। ऐसे स्थानों का प्रयोग दूसरे दलों और अभ्यर्थियों को भी उन्हीं शर्तो पर करने दिया जायें, जिन शर्तो पर सत्ताधारी दल उनका प्रयोग करता है। सत्ताधारी दल या उसके अभ्यर्थियों का विश्राम गृहों, डाक बंगलों या अन्य सरकार आवासों पर एकाधिकार नहीं हेागा और ऐसे आवासों का प्रयोग निष्पक्ष तरीके से करने के लिए अन्य दलों और अभ्यर्थियों को भी अनुमति होगी लेकिन दल या अभ्यर्थी ऐसे आवासों का इनके साथ संलग्न परिसरों सहित प्रचार कार्यालय के रूप में या निर्वाचन प्रचार के लिए कोई सार्वजनिक सभा करने की दृष्टि से प्रयोग नहीं करेगा या प्रयोग करने की अनुमति नहीं दी जायेगी।
निर्वाचन अवधि के दौरान सत्ताधारी दल के हितों की अग्रसर करने की दृष्टि से उनकी उपलब्धियों दिखाने के उद्देश्य से राजनैतिक सामाचारों तथा प्रचार की पक्षपात ख्याति के लिए सरकारी खर्चे से समाचार पत्रों में या अन्य माध्यमों से ऐसे विज्ञापनों का जारी किया जाना, सरकारी जन माध्यमों का दुरूपयोग ईमानदारी से बिल्कुल बंद होना चाहिए।
मंत्रियों और अन्य प्राधिकारियों को उस समय जब से निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन घोषित किये जाते हैं, विवेकाधीन निधि में से अनुदानों/अदायगियों की स्वीकृत नहीं देनी चाहिए।
मंत्री और अन्य प्राधिकारी, उस समय से जब से निर्वाचन आयोग द्वारा
निर्वाचन घोषित किये जाते है:-
किसी भी रूप में कोई भी वित्तीय मंजूरी या वचन देने की घोषणा नहीं करेंगे। (लोक सेवकों को छोडकर) किसी प्रकार की परियोजनाओं अथवा स्कीमों के लिए आधारशिलाएं आदि नहीं रखेंगे। सड़कों के निर्माण का कोई वचन नहीं देगें, पीने के पानी की सुविधाएं नहीं देंगे आदि या शासन, सार्वजनिक उपक्रमों आदि में ऐसी कोई भी नियुक्ति न की जायें, जिससे सत्ताधारी दल के हित में मतदाता प्रभावित हो।
केन्द्रीय या राज्य सरकार के मंत्री, अभ्यर्थी या मतदाता अथवा प्राधिकृत अभिकर्त्ता की अपनी हैसियत को छोड़कर किसी भी मतदान केन्द्र या गणना स्थल में प्रवेश नहीं करेंगे।

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