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एक सखा बने केंद्रीय मंत्री, एक बन गए जैन मुनि, मिले जब दोनों, एक दूजे की बात सुनी!

दमोह : दमोह जिला मुख्यालय के वसुंधरा नगर जैन मंदिर में विराजमान परम पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक् शिष्य प्रशांत सागर जी महाराज से मिलने के लिए जब केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री दमोह के सांसद प्रहलाद सिंह पटेल पहुंचे, तो लोगों ने यह माना कि सहज सरल स्वभाव के धनी और हर धर्म में अपनी आस्था रखने वाले केंद्रीय संस्कृति पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल मुनि श्री का दर्शन करने के लिए पहुंचे हैं, और बात भी यही थी। केंद्रीय संस्कृति पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल पूज्य मुनि श्री प्रशांत सागर जी महाराज का दर्शन करके उनका आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए पहुंचे थे। लेकिन कुछ ही देर के बाद जब मुनि श्री और केंद्रीय मंत्री के बीच बचपन की यादों पर चर्चा की जाने लगी, तो लोग आश्चर्यचकित होते नजर आए। जैन मुनि और केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने देर तक स्कूल से जुड़ी बचपन से जुड़ी बातों पर चर्चा की और मुस्कुराते नजर आए।

बाल सखा है मुनि प्रशांत सागर और प्रहलाद सिंह पटेल

परम पूज्य जैन मुनि प्रशांत सागर जी महाराज का गृहस्थ अवस्था का घर गोटेगांव में हैं। बचपन में वे कक्षा पहली से वर्तमान के केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के साथ एक ही स्कूल में पढ़े हैं। साथ ही दोनों के बीच बचपन से ही गहरी मित्रता रही है। वही प्रहलाद सिंह पटेल देश की राजनीति में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए आगे बढ़ते चले गए। तो मुनि प्रशांत सागर जैन मुनि बनकर स्वयं का एवं दूसरों का कल्याण करने में जुट गए। दोनों ही बाल सखाओ ने देश के लोगों को सदमार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने का काम शुरू किया। जहां जैन मुनि लोगों को अहिंसा का मार्ग दिखा रहे हैं। सदमार्ग पर चलने की सीख दे रहे हैं, और इस विश्व में आकर अपने जीवन का कल्याण करने की प्रेरणा दे रहे हैं। तो वहीं केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी भारत सरकार के मंत्री के रूप में पूरे देश ही नहीं विश्व में भारत का नाम रोशन करने में लगे हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्री द्वारा सादगी पूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा अपने गुरु से प्राप्त करने के बाद उन्हीं के सिद्धांतों पर चलने का संकल्प भी लिया है। ऐसे में जैन मुनि की सहृदयता और केंद्रीय मंत्री की सहजता छवि जब आपस में आमने-सामने मिली तो निश्चित ही दोनों के बीच सामंजस्य संवाद हुआ। बचपन से जुड़ी कई बातें हुई और स्कूल से जुड़ी अनेक स्मृतियों को जैन मुनि और केंद्रीय मंत्री ने याद किया। एक भक्त और एक गुरु के बंधन के बीच दोनों महान हस्तियों की सहृदयता देखकर आस-पास मौजूद लोग भी अभिभूत होते नजर आए।

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