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नगरीय निकाय प्रतिनिधियों के सहयोग से ही कोविड प्रबंधन संभव : मुख्यमंत्री श्री चौहान

दमोह : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शहरी क्षेत्रों में कोरोना की विपदा का सामना करने में नगर पालिका, नगर परिषद के जन-प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह लड़ाई किसी के लिए भी अकेले लड़ पाना संभव नहीं था। आप सबके सहयोग से ही प्रदेश में कोरोना को नियंत्रित किया जा सका है। आज प्रदेश की समग्र पॉजिटिविटी दर घटकर 4.82 प्रतिशत हो गई है। यह जन-प्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग से संभव हुआ है। कोरोना को नियंत्रित रखने, 31 मई तक लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करने और एक जून से व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे आरंभ करने की आगामी रणनीति भी नगरीय निकायों के जन-प्रतिनिधियों के सुझाव से ही बनेगी और इसका क्रियान्वयन भी आपके सहयोग से ही होगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान नगरीय क्षेत्रों के जन-प्रतिनिधियों अर्थात पूर्व तथा वर्तमान मेयर, नगरपालिका, नगर परिषद के पूर्व तथा वर्तमान अध्यक्षों और पार्षदों को कोविड-19 के नियंत्रण के प्रबंधन पर निवास से वीडियो कान्फ्रेंसिंग द्वारा संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मानवता के इतिहास में ऐसे संकट यदा-कदा ही आते हैं। इस चुनौतीपूर्ण समय में हमें सहयोग, समन्वय सक्रियता और सद्भावना की मिसाल प्रस्तुत करना है।

माइक्रो कंटेंटमेंट एरिया बनाकर सघन मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संक्रमण रोकने के लिए प्रदेश में लम्बे समय तक व्यापार और कार्यालयों को बंद नहीं रखा जा सकता है। एक जून से अनलॉक की प्रक्रिया आरंभ करने का विचार है। इसमें क्रमबद्ध रूप से गतिविधियाँ आरंभ की जाएंगी। कई नगरीय क्षेत्रों में कोरोना के प्रकरण कम हैं जबकि कई स्थानों पर इनकी संख्या अधिक है। इस स्थिति में हमें एरिया स्पेसिफिक रणनीति बनाना होगी। अपने जिलों के अधिक संक्रमण वाले वार्डों को हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित करना होगा। इन क्षेत्रों को माइक्रो कंटेंटमेंट एरिया बनाकर सघन मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। सघन टेस्टिंग के लिए अभियान जारी रहे। जिन घरों में कोरोना संक्रमण से प्रभावित व्यक्ति हैं उन्हें होम आइसोलेट किया जाए। यह भी सुनिश्चित करें कि ऐसे व्यक्ति परिवार के अन्य सदस्यों से नहीं मिलें। इसका लगातार अनुसरण करना आवश्यक होगा। परिवार वालों को समझाइश देकर इसके लिए तैयार किया जा सकता है। आवश्यकता होने पर मरीज को कोविड केयर सेंटर में रखने की व्यवस्था की जाए। अब प्रदेश में कोरोना प्रकरणों की संख्या कम है। अत: कॉन्टेंक्ट ट्रेसिंग को भी प्रभावी तरीके से लागू किया जाए इससे संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी। जन-प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में परिस्थिति अनुसार माइक्रो प्लानिंग कर मॉनिटरिंग करें।

कोविड सहायता केन्द्रों में हो टेस्टिंग की सुविधा

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जहाँ कोरोना का एक भी पॉजीटिव केस हो वहाँ टेस्टिंग जारी रहे। टेस्टिंग के लिए सघन गतिविधियाँ संचालित की जाएँ। भोपाल में आरंभ की गई मोबाइल टेस्टिंग व्यवस्था प्रभावी है, जिसका अनुसरण आवश्कतानुसार अन्य जिले भी कर सकते हैं। कोविड सहायता केन्द्रों में टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध करा कर इसका प्रचार आसपास के रहवासी क्षेत्रों में किया जा सकता है। 

संकट काल में सहायता

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में गरीब परिवारों की सहायता के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा दो माह का और राज्य सरकार द्वारा तीन माह का राशन उपलब्ध कराया गया है। कोरोना के प्रकोप में जो बच्चे अनाथ हो गये हैं उनके लिए पाँच हजार रूपये प्रतिमाह की पेंशन, नि:शुल्क राशन और उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए पोर्टल तैयार है। निर्माण श्रमिकों और स्व-सहायता समूहों के खातों में राशि जारी की जाएगी। यह सुनिश्चित करें की वार्डों में सब्जी, दूध तथा भोजन की व्यवस्था बनी रहे। दीनदयाल रसोई से संकट काल में लोगों को भोजन मिलता रहे। यह सुनिश्चित किया जाए की शहर में कोई भूखा न सोए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिन परिवारों में कोविड से मृत्यु हुई है उन्हें एक लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय भी लिया गया है।

जन-प्रतिनिधियों से सजगता और सक्रियता अपेक्षित

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नगरीय निकायों के जन-प्रतिनिधियों से निम्न कार्यों में सर्तकता, सजगता और समर्पण अपेक्षित है –

  • सामाजिक दूरी और मास्क पहनने के लिए नगरिकों को प्रेरित करना।
  • शहर में स्वच्छता ठीक बनी रहे।
  • पेयजल की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो।
  • विभिन्न स्थानों पर सेनेटाईजेशन और छिड़काव की कार्यवाही ठीक से हो।
  • अंतिम संस्कार के स्थानों पर स्वच्छता का बेहतर प्रबंधन हो।
  • कोविड केयर सेंटर, शमशान, कब्रस्तान आदि के मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक पद्धति से निपटान सुनिश्चित किया जाए।
  • प्रवासी श्रमिकों का शत-प्रतिशत पंजीयन किया जाए।
  • वैक्सीनेशन के लिए जागरूकता बढ़ाने में सहयोग दें।

वृक्षारोपण के लिए अंकुर कार्यक्रम

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश को ऑक्सीजन में आत्म-निर्भर बनाने के लिए विभिन्न जिलों में प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। प्राकृतिक रूप से पेड़ ही ऑक्सीजन देते हैं। मैंने स्वयं प्रतिदिन एक पौधा लगाने का संकल्प लिया है, जिसका मैं अनुसरण कर रहा हूँ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में जन-सहभागिता से वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए अंकुर कार्यक्रम आरंभ किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को स्वयं कम से कम एक पौधा लगाकर पौधे की फोटो एप पर अपलोड करना होगी।

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