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लोग कर रहे मनमानी, प्रशासन कर रहा आगाह, 12 वर्ष की बेटी का रोका गया विवाह!

महिला बाल विकास की टीम ने विवाह स्थल पहुंचकर 12 वर्षीय नाबालिक का रोका विवाह , विकासखंड के ग्राम सलैया का मामला

दमोह : बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है। इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए महिला बाल विकास जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन एवं पटेरा परियोजना अधिकारी कृपाल अठ्या निर्देशन में एक कार्य योजना बनाई गई है। जिसके तहत 05/06/2021 को विकासखंड के अंतर्गत ग्राम सलैया में एक नाबालिक बेटी का विवाह बांदकपुर चौकी के आनू ग्राम में होना तय हुआ था, बालिका का नाम मनीषा बसोर पिता बिल्लू बसोर माता चंद्ररानी एवं लड़के का नाम गौरी पिता करिया बांदकपुर चौकी आनु ग्राम तय किया गया था। जिसकी सूचना महिला बाल विकास परियोजना पटेरा को प्राप्त हुई थी।

परियोजना अधिकारी कृपाल अठ्या ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सूचना मिलते ही तत्काल सेक्टर सुपर वाइजर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा थाना पुलिस से पुलिस बल हरिशंकर मिश्रा जगदीश नेहा के नेतृत्व में टीम बनाई। संयुक्त टीम के साथ विवाह स्थल परिवार में पहुंच कर 12 वर्षीय नाबालिग बालिका का बाल विवाह रुकवाया गया।

उपस्थित परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह कानूनन अपराध होने की समझाइश दी गई। बाल विवाह एक कानूनन अपराध है तथा सामाजिक एवं शारीरिक बुराई के बारे में परिजनों एवं समाज को समझाया। जिस पर उनके द्वारा सहज से ही बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने की उपरांत ही विवाह किए जाने हेतु अपनी सहमति प्रदान की एवं विवाह रोकने के लिए सहमत हो गए। जहां बालिका के पिता द्वारा लड़के के पिता को फोन पर सूचित कर विवाह रोकने की सूचना तुरंत दी गई कि हमारी लड़की अभी नाबालिक है। 18 वर्ष पूर्ण होने पर ही शादी की जावेगी।

बालिका के परिजनों ने कहा कि हमें यह ज्ञात नहीं था कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह गैर-कानूनी है।आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा संदेश दिए जाने पर उन्होंने उक्त बालिका का व्यवहार 18 वर्ष के उपरांत किए जाने हेतु कथन पूर्वक पंचनामा कार्यवाही पर हस्ताक्षर किए तथा उन्हें बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम 2006 में उल्लेखित प्रावधानों के बारे में कार्यकर्ताओं द्वारा बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का इस वर्ष से कम आयु का बालक का विवाह करना या करवाना अपराध है। जो भी व्यक्ति ऐसा करता है या विवाह में सहयोग प्रदान करता है, तो उसे भी 2 वर्ष का कठोर कारावास अथवा 1लाख का जुर्माना हो सकता है अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।

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