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त्योहारों के दिनों में शासकीय प्रशिक्षण क्यों ? प्रशिक्षण योजना बनाने वालों पर सवाल!

दमोह : इन दिनों गणेश उत्सव पर्व एवं पर्यूषण पर्व चल रहा है। यह त्यौहार 365 दिन में केवल एक बार ही आते हैं। कोरोना काल के चलते इन त्योहारों को मनाने के लिए शासन के द्वारा गाइडलाइन लगाई गई है, तो उसी गाइडलाइन का पालन करते हुए त्योहारों को मनाने के लिए जहां लोग मजबूर भी हैं और लोग गाइड लाइन का पालन करते हुए त्यौहार मना भी रहे हैं, लेकिन शासकीय कर्मचारी इन दिनों प्रशिक्षण में व्यस्त हैं और उनको त्यौहार के मौसम में प्रशिक्षण का चाबुक चलाकर व्यस्त कर दिया गया है। ऐसे में प्रशिक्षण में शामिल होने वाले लोग त्यौहार भी अपनी शासकीय ड्यूटी करते हुए ठीक ढंग से नहीं मना पा रहे हैं। उन्हें प्रशिक्षण के लिए हटा आना जाना पड़ रहा है।

त्यौहार के दौरान बनाया गया प्रशिक्षण सत्र

दरअसल शिक्षा विभाग के द्वारा शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया है। जिस पर पांच दिवसीय यह सत्र 13 सितंबर से 17 सितंबर तक और दूसरा सत्र 18 सितंबर से 5 दिन के लिए चालू किया गया है। ऐसे में जब दोनों सत्रों के दौरान गणेशोत्सव पर्व और पर्युषण पर्व आ रहे हैं। ऐसे में इसी बीच में पड़ने वाले कुछ महत्वपूर्ण त्यौहार भी हैं। जिनमें विशेष रूप से लोग व्रत उपवास करते हैं। ऐसे में शासकीय शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए हटा बुलाया जाना उचित प्रतीत नहीं होता। जबकि इन त्योहारों के बाद भी यह प्रशिक्षण आयोजित किए जा सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि गणेश उत्सव और पर्यूषण पर्व के बीच में ही इस प्रशिक्षण सत्र को बनाया गया और उसे फलीभूत भी किया जा रहा है। जिसके लिए 13 सितंबर से शिक्षक प्रशिक्षण लेने हटा भी आने-जाने लगे है।

व्रत उपवास करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को परेशानी

शासन के आदेश के बाद शिक्षा विभाग के द्वारा जारी किए गए निर्देश पर संबंधित लोगों के द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया जाने लगा है। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी व्रत उपवास करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को हो रही है। जहां गणेश उत्सव पर्व के दौरान भी अनेक व्रत उपवास लोग करते हैं। वही पर्यूषण पर्व के दौरान भी जैन समुदाय के लोग 10 दिन के व्रत उपवास करते हैं। ऐसे में इस प्रशिक्षण में शामिल प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण में आने जाने के चलते व्रत उपवास करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे हालात में प्रशिक्षण के सत्र का आयोजन करने वाले तथा इसकी कार्ययोजना बनाने वाले लोगों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं। इस प्रशिक्षण में भाग लेने वाले लोग तो इसको लेकर कुछ भी बोलने तैयार नहीं है। लेकिन निश्चित ही पर्व के दौरान वे लोग कठिनाई का अनुभव तो कर ही रहे हैं।

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