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जब प्रशासनिक अधिकारियों ने पेश किए कलाम और कविताएँ!

भोपाल : आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर उर्दू अकादमी द्वारा इज़हार/अभिव्यक्ति शीर्षक से ऑनलाइन मुशायरे/कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुशायरे में देश प्रदेश के काव्य पाठ और शायरी में रुचि रखने वाले प्रशासनिक अधिकारियों ने काव्य पाठ और कलाम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर किया गया।

कार्यक्रम में आनंद कुमार शर्मा ने यारों की बातें चल निकलें दिन छोटा पड़ जाए और यादों की चुनरी ओढ़े मन बाराती हो जाए, डॉ अखिलेश मिश्रा ने मैं सिकुड़ के भी जनाज़े में सो जाऊँगा और है कफ़न की बढ़ी बाज़ार में क़ीमत यारों, श्री मुज़फ्फर अब्दाली ने आज दीवानों की क़ीमत में उछाल आया है और आज बाज़ार में मग़रूर खड़े हैं हम भी, श्री फ़ैयाज़ फारूकी ने यह दरिया तैरने वालों को मार देता है और तो इसमें डूब के अपना बचाओ करते रहो, श्री नीरज वशिष्ठ ने क्या हो गया है मिरे देश को, मिरा देश जो खोजता है अपने को, देखता है अपने को तलाशता हुआ और कहीं अपनी खोती हुई पहचान को, श्री अजय सहाब ने सीखा इसी से दर्द ये हिन्दोस्तान का, बचपन से मुझ पे क़र्ज़ है उर्दू ज़बान का, बाजार में भी कह गया मेयार पर ग़ज़ल और सौदा न हो सका कभी उर्दू की शान का। श्री आलोक यादव ने बहुत चर्चे थे जिस दर की सख़ावत के यहाँ और वो औरों पर खुला हम सर झुकाते रह गए, श्रीमती मोनिका सिंह ने धूप कच्ची, शाम तन्हा और अंधेरे का हुजूम और इनमें अपना अक्स दिखलाती चली पागल हवा, श्री लक्ष्मण सिंह मरकाम ने तिमिर घना है स्वान बहुत हैं- तरफ़ हमारे बाण बहुत हैं और अवरोधों से भरा है पथ यह इस पथ पर भी चलना होगा-शीश उठा कर चलना होगा, श्री मनीष शुक्ला ने उनकी नज़रों से गिर गया मतलब और उनकी नज़रों में मेरी क़ीमत थी, सुश्री शीला दाहिमा ने ज़िंदगी मिलेगी दोबारा- बस तुम जान लो, श्री राजेश गुप्ता ने कविता अभिलाषा और मैं चाहता हूँ तुम मर्यादित हो राम से, श्री शशांक गर्ग ने अक्सर याद आता है ;बचपन,अक्सर याद आती है “अम्मा”, सुश्री पल्लवी त्रिवेदी ने आपकी इज्ज़त आपके कर्मों में बसी आपने दान किया ..आपकी इज़्ज़त बढ़ी और श्रीमती स्मिता राजन ने तुम खंगालना मन मेरा, जब कंठ में उगे काटों को, तुम पढ़ना मेरा मन  पर रोचक और ओजपूर्ण शैली में काव्यपाठ किया।

उर्दू अकादमी निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने कहा कि आज़ादी के अमृत महोत्सव में जहाँ हर वर्ग अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति  किसी न किसी माध्यम से कर रहा है। हमारे प्रशासनिक अधिकारी जो साहित्य/काव्य सेवा में रुचि रखते है और देश सेवा के साथ साथ रचनात्मक कार्य भी कर रहे हैं, उन्हें अभियक्ति का मंच प्रदान करने की कोशिश की गयी है।

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