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दुष्‍ट आदमी विषैले नाग से भी घातक होता है- श्री बागेश्‍वर धाम सरकार!

हटा / दमोह : सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे! तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: !! हे सत् चित्त आनंद! हे संसार की उत्पत्ति के कारण! हे दैहिक, दैविक और भौतिक तीनो तापों का विनाश करने वाले महाप्रभु, हे समस्‍त संसार का सृजन करने वाले, जिनके पावन चरणों को नमन करके हम अपनी दैनिक भौतिक कार्य सम्‍पादित करते है ऐसे ठाकुर जी को प्रणाम करते है, सूर्य की भांति जिनका ज्ञान है, जो हमारे अंदर के क्रोध, काम, हिन्‍सा रूपी अंधकार का नाश करके जीवन में उजाला करते है हे योगीश्‍वर तुम्‍हे प्रणाम, यह बात आज गुरूवार को देवश्री गौरीशंकर मंदिर परिसर के विशाल दद्दा जी मंच से श्री बागेश्‍वर धाम सरकार ने श्रीमद भागवत महापुराण कथा में प्रथम दिवस श्री कृष्‍ण के सचिदानंद रूपाय श्‍लोक का अर्थ बताते हुए कही।

सरकार ने कहा कि हमारे कर्म ही हमारे आने वाले दिन का परिणाम सुनिश्चित करते है, जिस खेत में हम चना की बोनी करते है तो हमे काटने पर चना ही मिलेगा उडद नहीं। इसी तरह हमारे जो कर्म है उसके अनुसार ही हमारा भविष्‍य तय होता है,
उन्‍होने श्री रामचरित मानस की चौपाई सुर नर मुनि सब कै यह रीती। स्वारथ लागि करहिं सब प्रीति सुनाते हुए कहा कि आज इंसान इतना स्‍वार्थी हो गया है कि वह अपना मूल चरित्र को छोडकर उस जहरीले नाग से भी ज्‍यादा घातक है जो डसने के पहले फुसकार चेतावनी तो देता है लेकिन यह दुष्‍ट मानव तो कब डस ले पता ही नहीं चलता है, इन सबसे बचने के लिए ही प्रभु का नाम, सत्‍संग, माला, कथा श्रवण करना चाहिए, यही कथा आपके ज्ञान और वैराग्‍य जो मूच्छित अवस्‍था में है उन्‍हे जाग्रत करेगी, भगवान की कथा को बार बार श्रवण करके अपने हृदय में स्‍थाई रूप से जमा कर लेना चाहिए, जैसे प्‍यास से किसी व्‍यक्ति की मृत्‍यु हो रही है तो उसे पानी की कुछ बूंदे उसे जीवन प्रदान करती है ठीक उसी प्रकार प्रभु की कथा जीवन जीने की उत्‍तम राह दिखाती है।

श्री सरकार ने गौकर्ण और धुंधकारी की कथा सुनाते हुए कहा कि संत की वाणी पर भगवान भी विचार करता है, यह कथा बताती है कि धुंधकारी जैसे पुत्र पूरे कुल को कलंकित करते है तो गौकर्ण जैसी संतान पूरे कुल को सदमार्ग पर ले जाते है,
प्रथम दिवस कथा का श्रवण करने बडी संख्‍या में भक्‍त उपस्थित रहे।

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