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मोहरूपी अज्ञान तम का नाशक ज्ञानकल्याणक-मुनिश्री अजितसागर

पथरिया : लखरोनी में चल रहे पंचकल्याणक के पांचवे दिन ज्ञानकल्याणक के दिन भगवान को केवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। जानकारी देते हुए प्रचार मंत्री कवीश सिंघई ने बताया कि मोक्ष के पूर्व की अंतिम क्रिया ज्ञान होती है। इसलिए ये कल्याणक मनाया जाता है। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा की ज्ञानवान वही है जो आचरणवान हो क्योंकि जहां पर आचरण है वहां पर ज्ञान नियम से सम्यग्ज्ञान का रूप लेता है। व्यक्ति के जीवन में दो शक्तियां होती हैं। शारीरिक एवं आत्मिक जिसमें शारीरिक शक्ति उम्र के अनुसार बढ़ती है तो वृद्धावस्था में घट जाती है, पर आत्मिक शक्ति उम्र के साथ बढ़ती जाती है। वेदांत दर्शन के अनुसार आत्मा ज्ञान स्वरूपी है। आत्मा को ज्ञान स्वरूपी सभी दर्शनों में माना है जैन दर्शन में कहा गया है कि जो एक को जानता है। वो सबको जानता यानी कि आत्मा को जानने वाला सबको जनता है। सायंकालीन आरती विद्यासागर पाठशाला गढ़ाकोटा के बच्चों द्वारा गुरुगाथा नाटिका की सुंदर प्रस्तुति दी गई।

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