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450 साल पुराना दरबार, सदी का पहला सहस्त्र चंडी महायज्ञ होगा इस बार !

संजय जैन हटा/ दमोह : जो शहर नदी के किनारे बसे होते है, उस नदी से प्रवाहित होने वाला जल स्‍वमेव ही शहर के धार्मिक, अध्‍यात्मिक, कला, संस्‍कृति, साहित्‍य को अभि सिंचित करता है. नगर से निकलने वाली पवित्र् सुनार नदी के जल में ही वह तेज है कि कोसो दूर से गुजराती खेडावाल परिवार के द्वारा करीब 450 वर्ष पूर्व अपनी आराध्‍य देवी मां चण्‍डी जी की प्रतिमा को हटा नगर के ईशान दिशा में स्‍थापित किया था. पूर्व में यह प्रतिमा मात्र् एक चबूतरा पर एक छोटी सी मढिया में रखी थी. इसके बाद छोटा गुम्‍बद आकार का मंदिर बना. इसका निरंतर विकास होता रहा, वर्ष 2005 में मंदिर की निर्माण कमेटी गठित हुई. जिसके द्वारा दक्षिण भारतीय मंदिरों के अनुरूप गुम्‍बद का निर्माण कराया गया. यज्ञशाला को भव्‍यता प्रदान करते हुए सामुदायिक भवन, मंदिर परिक्रमा स्‍थल, परिसर में टाइल्‍स, मार्बल का भी कार्य कराया. निर्माण कार्य ने इस स्‍थल को रमणीक, शोभायमान एवं तीर्थस्‍थल जैसी आभा विखेरने वाला स्‍थल बना दिया.

पूर्व से ही यहां पर आसपास के गांव के लोग देवी उपासना, उपवास, उद्यापन, पूजन, मन्‍नत मांगने के लिए आते है. यहां प्रतिवर्ष कई बार नौ चण्‍डी एवं शत चण्‍डी महायज्ञ सम्‍पन्‍न होते है. यहां आयोजित होने वाले चण्‍डी यज्ञ में सबसे बडी विशेषता यह है कि यज्ञ गुजराती परम्‍परा के अनुसार स्‍थानीय विद्वान पण्डितों के द्वारा सम्‍पन्‍न कराया जाता है. जो कही दूसरी जगह देखने को नहीं मिलता.

समुचा बुंदेलखण्‍ड में मातृ पूजा प्रधान रहा है. पहले गांव नगर की रक्षा के लिए गांव पूर्ववर्ती सीमा पर ईशान दिशा में देवी देवताओं की स्‍थापना की जाती है. इसी उद्देश्‍य को लेकर इस प्रतिमा की स्‍थापना की गई थी. बाद में ये स्‍थल एक सिद्द पीठ के रूप में पूजा जाने लगा. यहां हर वर्ग, हर धर्म समाज के लोग आकर देवी आराधना करते है. चैत्र् एवं शारदेय नवरात्र् पर नौ दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है. नववर्ष, दीपावली व होली की परमा पर भी बडी संख्‍या में भक्‍तगण यहां आते है. दूर दूर से भी लोग यहां आकर धार्मिक अनुष्‍ठान कराते है. मंदिर परिसर में ही दक्षिण मुखी हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है. जहां हर शनिवार व मंगलवार को विविध धार्मिक आयोजन होते है. परिसर में बने मंदिरों में बकुटि भैरव, शंकर जी, दुर्गा जी, नाग बाबा की प्रतिमाएं है. जिनके पूजन के लिए भी भक्‍त आते है.

29 जनवरी 2020 से सदी का पहला सहस्‍त्र् चण्‍डी महायज्ञ प्रारंभ हो रहा है. इस दस दिवसीय धार्मिक अनुष्‍ठान का शुभारंभ कलश यात्रा के माध्‍यम से होगा. यह कलश यात्रा नगर के मुख्‍य मार्गो से निकाली जायेगी. इसी कलश यात्रा के माध्‍यम से नगरवासियों को इस अनुष्‍ठान में आहुति देने के लिए न्‍योता दिया जायेगा. दस दिवसीय आयोजन में एक ओर जहां यज्ञ में आहुति दी जायेगी. वही दूसरी ओर सायंकाल धार्मिक भजन संध्‍या एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेगें. सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से इस आयोजन में अपनी सहभागिता दर्ज कराने की अपील आयोजन समिति के द्वारा की गई है.

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