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24 कुंडों में आहुति, देवों का आह्वान

हटा : यज्ञ हवन के साथ संस्कार में दीक्षा संस्कार, जनेऊ संस्कार , पुंसवन संस्कार ,नाम करण संस्कार कराया गया.
प्रज्ञा पुराण कथा वाचक श्री देवेश शर्मा जी ने कहा – भारतीय संस्कृति देव संस्कृति है प्रत्येक भारतवासी देवता हैं. वर्तमान समय मे दानव प्रवत्तियां मानव के अंदर आ गई है. आज मनुष्य के अंदर आस्था का भाव खत्म हो गया है. इसलिए माता पिता से दूरी बनाकर रह रहे हैं. बंटवारा जैसी समस्याओं में समाज उलझ गया है. इन दानव प्रवत्तियों को खत्म करने ही मनुष्य के अंदर देवत्त का उदय करना अति आवश्यक है. यही काम गायत्री परिवार कर रहा है.
मनुष्य के अंदर देवत्त का उदय एवं धरती पर स्वर्ग का अवतरण इसी उद्देश्य को लेकर गायत्री परिवार समूचे विश्व कल्याण के लिए कार्य में लगा हुआ है. यज्ञ उपरांत शांतिकुंज की टोली ने महिला मंडल प्रज्ञा मंडलो को मार्गदर्शन देते हुए नए परिजनों जोड़ने में समाज में कुरीति खत्म करने मार्गदर्शन दिया. बड़ी संख्या में महिलाओं ने सहभागिता दिखाई. श्रीमती संध्या राजपूत, श्रीमती उषा नेमा सहित दो दर्जनों से अधिक महिलाओं ने महिला मंडल में अपनी सहभागिता से कार्य को गति प्रदान करने की बात कही. ट्रस्टी प्रंबधक पूर्व विधायक डॉ विजय सिंह राजपूत में बताया 24 कुंडीय हवन के पश्चात सभी परिजनों के साथ नगर वासियों के भोजन की व्यवस्था भी की गई हैं,भंडारा व्यवस्था में युवा प्रकोष्ठ के शैलेन्द्र नायक , अशोक चौरसिया , सौरभ नेमा , दीपक पटवा,रियल अग्रवाल, राहुल कुशवाहा द्वारा देखी जा रही है. साहित्य स्टाल पर ए .एल. सिंह , जय प्रकाश नेमा , बलराम सराफ ,शोभित अग्रवाल द्वारा सहयोग दिया जा रहा है. यज्ञ हवन कार्य में राजू दुबे, मनमोहन विश्वकर्मा, एम.पी. बाथरे, माखन लाल नेमा, प्रह्लाद चौधरी द्वारा व्यवस्थाये देखी जा रही है.

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