ये आग कब बुझेगी

कभी जाति के नाम पर, कभी मज़हब के नाम पर कभी राजनैतिक दलों से सम्बन्धो के आधार पर अपराधी का समर्थन करते हो. अपराधी को हीरो बनाते हो, उसकी पूजा करते हो, माला पहनाते हो, उसके जन्मदिन सालगिरह पर बधाई देते हो उसके जिंदाबाद के नारे लगाते हो और फिर अपराध रोकने की बात करते हो. जब तक अपराधियों के विरुद्ध एक माहौल नहीं बनेगा, अपराध कम नहीं होगा. अपराधी किसी भी कौम का हो, जाति का हो, मजहब का हो, किसी भी राजनेतिक दल से क्यो न जुड़ा हो, जागरूक एक्टिव लोगो को समाज के सब लोगों को उठाना होगा और अपराध के खिलाफ लड़ना होगा. “कौन सा आदमी गारंटी दे सकता है कि अब कोई अपराध नहीं होगा❓ कल सुबह अपराध नहीं होंगे❓ यहां 15-16, साल के बच्चे शराब का सेवन कर रहे हैं, स्मैक, हेरोइन,सुलोचन का सेवन कर रहे हैं. नशा करना जीवन का एक तरीका बन गया है. अपराध रोकना सिर्फ पुलिस का काम नहीं है. जबकि पुलिस अपराध को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार विशिष्ट एजेंसी है. लेकिन जब लोग जाग नहीं जाते, तब तक एक्टिव लोग जागरूक लोग एक ऐसा माहौल बनाएं जो अपराधियों के पक्ष में न हो।” गलत को गलत कहें, गलत का विरोध करें, चाहे गलत आपका अपना ही क्यो न कर रहा हो. यदि ऐसा नही किया तो आज नही तो कल आपका भी नम्बर जरूर आएगा. तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. यदि सड़कें सूनी हो जायेंगी तो अपराधियो द्वारा निर्मित सत्ता बेलगाम हो जायेगी.
संसद का रास्ता सड़क से होकर ही जाता है.
जय हिंद
-बेबाक राय

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