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मानव को सम्मान – समानता का अधिकार

दमोह : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं प्रिंसिपल जिला जज/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शंभू सिंह रघुवंशी के मार्गदर्शन में अर्तराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास तेंदूखेडा में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में माखनलाल झोड़, सचिव/अपर जिला न्यायाधीश, रजनीश चैरसिया, जिला विधिक सहायता अधिकारी, श्रीमति रजनी जैन अधीक्षका, व छात्रावासी छात्रायें उपस्थित रही. सचिव/अपर जिला न्यायाधीश माखनलाल झोड़ ने बताया कि मानव अधिकार किसी भी व्यक्ति के जीवन, आजादी, बराबरी व सम्मान का अधिकार है. भारतीय संविधान इस अधिकार की गांरटी देता है एवं इसका उल्लंघन करने वालों को न्यायालय द्वारा सजा दी जाती है आपने बताया कि मानव के हित में कार्य अधिकारों की रक्षा करने के लिए मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया है. किसी मानव अधिकार के उल्लंघन होने पर आयोग के समक्ष षिकायत की जा सकती है. साथ ही आपने पाक्सो अधिनियम, मूल कर्तव्य, बालकों को मैत्री पूर्ण विधिक सहायता एवं पाॅक्सो अधिनियम के संबंध में छात्राओं को अवगत कराया. जिला विधिक सहायता अधिकारी दमोह रजनीश चैरसिया ने छात्राओं को संबोधित करते हुये कहा कि मानव अधिकार किसी भी मानव के मूल-भूत सार्वभौमिक अधिकार है, व किसी भी मानव को धर्म, लिंग, जाति इत्यादि के आधार पर उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है. सभी व्यक्तियों को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार भी प्राप्त है. साथ ही आपने आपराधिक विधि में बालिकाओं के हितार्थ किये गये संशोधनों, घरेलू हिंसा, बाल-विवाह, चाईल्ड हेल्प लाईन, महिला हेल्प लाईन के संबंध में जानकारी देते हुये कहा कि आपको प्राप्त अधिकारों का प्रयोग आवष्यकता पड़ने पर आवष्यक रूप से करना चाहिये. कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन श्रीमति रजनी जैन अधीक्षका के द्वारा किया गया.

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