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चाइना की राखियां, इन बहनों को पसंद नहीं आई, अपने हाथों से राखी बनाई!

कहानी सच्ची है, भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधने के लिए कई दिन के जतन के बाद खुद बना ली राखियां, आत्म निर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने संदेश दे रही यह बेटियां..

दमोह : बीते साल इन्हीं दोनों किसी ने भी नहीं सोचा था कि रक्षाबंधन के त्यौहार को भी पूरी तरह से कैप्चर कर चुका चाइना अगले साल अपने किसी कृत्य के कारण पूरी तरह से पूरे विश्व में अपना मार्केट खो देगा, लेकिन चाइना की एक गलती ने न केवल लोगों को आत्म निर्भर बना दिया. वहीं भारत की बेटियां अब अपने भाइयों की कलाइयों पर चाइना की राखियों को नहीं बांधना चाहती, बल्कि वह अपने हाथों से बनाई राखियां बांधकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दे रही हैं.

दमोह जिला मुख्यालय के फुटेरा वार्ड नंबर 2 में रहने वाली स्वस्ति और समृद्धि अग्रवाल नाम की दो नन्ही बिटिया है, इन दिनों लोगों को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही हैं, इन दोनों बहनों ने छोटी सी उम्र में ही स्व-देशी सामग्री उपयोग का मूल मंत्र सिखाया है. इन दो बहनों ने जहां चाइना से बनी राखियों को भारत के बाजारों से नहीं खरीदने का मन बनाया, तो वही अपने भाइयों की कलाइयों पर अपने हाथों से बनी राखियों को बांधने का संकल्प भी लिया, यह बहने बीते कुछ दिनों से अपने घर पर अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधने के लिए तैयारी कर रही है. छोटी सी उम्र में ही इन दोनों बहनों का कहना है कि उन्होंने रक्षाबंधन के त्यौहार के लिए स्वयं ही राखियां बनाकर लोगों के बीच आत्मनिर्भर भारत का संदेश दिया है.

स्वस्ति और समृद्धि नामक दोनों बहनों का कहना है कि भाई-बहन के पवित्र बंधन का यह पर्व अब चाइना पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि आत्म निर्भर भारत अभियान का हिस्सा बनकर लोगों को अपने देश के लिए कुछ करने का संदेश जरूर देगा.

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