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दमोह में 144 धारा लागू

दमोह : जिला मजिस्ट्रेट तरुण राठी ने पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह के प्रतिवेदन आधार पर जिला क्षेत्र अंतर्गत कानून व्यवस्था की प्रतिकूल स्थिति निर्मित ना हो इस हेतु आज 19 दिसंबर की शाम 5 बजे से दमोह जिला क्षेत्र अंतर्गत किसी भी धर्म जाति संप्रदाय की भावनाओं को आहत करने वाले फेसबुक, व्हाट्सएप, टि्वटर अन्य सोशल मीडिया तथा इंटरनेट साइट्स आदि पर पोस्ट कमेंट, लाइक क्रास कमेंट, फॉरवर्डिंग आदि तथा सार्वजनिक स्थलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी, भाषण वक्तव्य को दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत वर्जित किया जाकर दमोह जिला सीमा क्षेत्रान्तर्गत निषिद्ध घोषित किया है. आदेश का उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी.

यह आदेश दमोह जिला सीमा क्षेत्र अंतर्गत तत्काल प्रभाव से प्रभाव शील किया जाना आवश्यक है, इसकी सूचना में भी समय-समय में कहानी गुंजाइश नहीं है. अतः यह आदेश एक पक्षीय रूप से पारित किया जा रहा है, संबंधित थाना प्रभारी इस आदेश की तामिली दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 134 (2) में उल्लिखित रीति अनुसार स्थानीय दैनिक समाचार पत्र में उद्घोषणा प्रकाशित कर तथा ऐसे सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा कर प्रकाशित करावेगी जो जनता को पहुंचाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हो.

पुलिस अधीक्षक श्री सिंह के प्रतिवेदन में कहा गया है केंद्र सरकार द्वारा नागरिक संशोधन बिल पास किए जाने के विरोध को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम तथा ऐसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर कतिपय असामाजिक तत्वों के कई समूहों द्वारा सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने दो वर्गों समुदायों के मध्य संघर्ष, वैमनस्यता की स्थिति निर्मित करने हेतु तरह-तरह के आपत्ति जनक संदेश एवं चित्र, वीडियो, ऑडियो मैसेज का प्रसारण किया जा रहा है. तथा प्रसारण के माध्यम से एक स्थान पर एकत्रित होने एवं जातीय, धार्मिक समूह के विरुद्ध वातावरण निर्मित करने जैसे संदेशों का प्रसारण होने की संभावना है. जिससे दमोह जिले की सामुदायिक सद्भावना एवं शांति व्यवस्था के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां के मद्देनजर वैमनस्यता का वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है. इस तरह की गतिविधियों से जनसामान्य के स्वास्थ्य व जानमाल को खतरा उत्पन्न हो सकता है. भविष्य में इन कारणों से लोकशांति भंग करने की प्रबल आशंकाये व्याप्त हो रही है. अतः इस प्रकार की सामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाए जाने की तत्काल आवश्यकता प्रतीत हो रही है. लोक शान्ति एवं कानून व्यवस्था की दृष्टि से नियमानुसार धारा 144 सीआरपीसी के तहत निषेधाज्ञा लागू करना आवश्यक बताया है. ऐसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के साथ-साथ शहर एवं जिले की कानून व्यवस्था अविच्छित बनी रहेगी.

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