जरा ध्यान दीजिए ! यदि आपके यहाँ भी बच्चे हैं ?

महेंद्र दुबे की कलम से

जी हां शीर्षक पढ़कर आपको अजीब लग रहा होगा, लेकिन आपके लिए इसे जानना बेहद जरूरी है ताकि आप भी अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकें. दरअसल दमोह के जबलपुर नाका इलाके से तीन बच्चे गायब हुए उनकी असलियत से आपको रूबरू कराना बेहद जरूरी है. बच्चो के गायब होने के बाद परिवारो पर क्या गुजर रही होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है. लेकिन उतने ही परेशान शहर के लोग पुलिस प्रशासन भी था. सवाल एक साथ तीन मासूमों का था, लिहाजा चिंता जायज थी. जिस तरह से दमोह के नोजावनो के साथ हर वर्ग ने सोशल मीडिया का जबरदस्त सकारात्मक इस्तेमाल किया, वो वाकई काबिले तारीफ है और हर एक उस शख्स का साधुवाद, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस मुहिम में हिस्सा लिया.

अब बात मुद्दे की

बच्चो की तलाश में सब परेशान थे, इस बीच पुलिस ने गायब हुए बच्चो के साथियों को बुलाया बस उसी उम्र के दो बच्चे … उन दोनों मासूमों ने गायब हुए तीनो बच्चो के बारे में जो बताया उसके मुताबिक बच्चे पिछले एक हफ्ते से दिल्ली जाने का प्लान बना रहे थे और दिल्ली जाने की वजह आई फोन ख़रीदना था. मासूमो ने जो बताया उसके मुताबिक इसके लिए तीन बच्चों में से एक ने घर से कुछ रकम भी चुराई हुई थी. पिछले कुछ दिनों से इनमें से एक बच्चा पांच पांच सौ के नोट लिए घूम रहा था. शनिवार की शाम इन पांचों बच्चो ने शाम तक मस्ती की फिर दो बच्चे अपने घर चले गए तीन गायब. दो बच्चे धीरे धीरे सब बयान कर रहे थे और ये दोनों भी मोबाइल के एक्सपर्ट बच्चे हैं, जिन्हें देखकर हम सब हैरान थे. सायबर सेल के एक्सपर्ट भी इस उम्र के बच्चों की जानकारी उनके क्रियाकलाप देखकर सन्न थे. आखिरकार बच्चो ने ये लाइन दे दी कि तीनों गायब बच्चे दिल्ली जाना चाहते हैं. पुलिस शहर और रेलवे स्टेशन के सी सी टी वी कैमरे खंगाल रही थी, तभी दोनों बच्चों ने एक इशारा और दिया कि गायब हुए बच्चे बता रहे थे कि यदि दमोह से ट्रेन नही मिली तो जबलपुर से ट्रेन पकड़ेंगे.

बच्चो की इस बात को पुलिस और हम सब ने गंभीरता से लिया औऱ प्रशासनिक तौर पर जबलपुर पुलिस और आर पी एफ को सूचना दी गई. पर साथ ही दमोह के वरिष्ठ समाजसेवी श्री राजीव खोसला के अनुज श्री संजीव खोसला जो कि आर पी एफ जबलपुर में प्रधान आरक्षक है उन्हें जानकारी दी. संजीव ने व्यक्तिगत रुचि लेते ततपरता दिखाई और स्टाफ ने सर्च अभियान चलाया तो तीस मिनिट के भीतर जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म से तीनों लापता बच्चे बरामद कर लिए गए. खबर लगते ही हम सब खुश हुये, लेकिन जो बातें सामने आई वो चिंता में डालती हैं. जबलपुर में जब आर पी एफ के जवानों के साथ संजीव खोसला ने पूंछतांछ की तो बच्चो ने गुमराह किया, कि वो जबलपुर के ही रहने वाले हैं लेकिन संजीव को असलियत मालूम थी क्योंकि तीनो परिवार भी उनसे व्यक्तिगत परिचित हैं.

ये घटनाक्रम सामान्य ही लगेगा लेकिन चिंताजनक इसलिए हे कि बच्चो को मोबाइल का शौक उसका नशा खतरनाक है. हमारे बच्चे आधुनिक जमाने मे किसी से पीछे न रहें सब भरपूर कोशिश करते है. लेकिन कई दफा उनकी मॉनिटरिंग न हो पाना जटिल हो जाता है. बच्चे टेक्नालॉजी का इस्तेमाल करें हर कोई चाहता है, लेकिन इस टेक्नालॉजी के इस्तेमाल के साथ उनका भटकाव भी ध्यान देने योग्य है.

माता पिता अपनी व्यस्तताओं के कारण बच्चो की गतिविधियों पर ध्यान नही दे पाते. बच्चो की छोटी मोटी चोरियों पर भी ध्यान नही देते या कई दफा इन चोरियों को अनदेखा कर देते हैं या लाड़ प्यार की वजह से ज्यादा कुछ कहते नही, लेकिन बच्चे फिर ऐसा कर जाते हैं जो इन तीन बच्चों ने किया. ये ईश्वर की कृपा दृष्टि ही थी कि समय रहते इनके बारे में जानकारी मिल गई. ईश्वर न करता कि ये दिल्ली या किसी दूसरी जगह की ट्रेन में बैठ जाते, किसी गलत हाथ में चले जाते, तो फिर क्या होता. तमाम शहर वासियों की दुआओं और कोशिशों ने तीनों को अपने घर भेज दिया.

लेकिन इस घटनाक्रम के बाद हम आप सब से गुजारिश जरूर करेंगे कि आप जिन व्यस्तताओं का हवाला देते हैं, ये व्यस्तताएं या आपकी मेहनत आपके बच्चों के लिये ही आप कर रहे हैं तो फिर बच्चो पर ध्यान जरूर दें. न सिर्फ टेक्नालॉजी के इस्तेमाल पर बल्कि उनकी रहन सहन आना जाना बोलचाल उसके आचार विचार सब की जवाबदारी आपकी है जब तक कि वो समझदार न हो जाये. ये सारी बातें आप सब पहले भी सुन और पढ़ चुके होंगे, लेकिन एक बार फिर पढ़कर अमल करने का आग्रह करेंगे बस ये सोचकर कि कहीं आपका या आपके आसपास का कोई बच्चा ऐसे गायब न हो जाये जैसे तीन बच्चे गायब हुए थे. इसके आगे आप सब समझदार हैं.

तीनो मासूमो को घर वापिसी की बधाई


दमोह के पुलिस प्रशासन तमाम उन लोगों का साधुवाद जो देर रात तक पीड़ित परिवारों के साथ खड़े रहे और वो तमाम लोग जिन्होंने वाकई सोशल मीडिया का बेहतरीन इस्तेमाल करके मिनटों में हर एक तक ये खबर पहुंचा कर सदभाव का निर्माण किया. विशेष धन्यवाद आर पी एफ जबलपुर के आला अधिकारियों और दमोह की मिट्टी के लाल भाई संजीव खोसला बब्बल का जिन्होंने परिवार की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने फर्ज को निभाया और तत्काल सक्रिय होकर दूसरे शहर में बच्चो को किसी अपने के होने का एहसास दिलाया. पुनः तमाम मददगारों का साधुवाद इसी उम्मीद के साथ कि आप सब भी अपने बच्चों पर अब विशेष ध्यान देंगे.

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